प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के पास 5 रूपए के साथ भेजी गई ये ये चिट्टी जाने क्या लिखा था उसमे

आप वीकेंड में पार्टी पर कितने रुपए खर्च करते हैं, कम से कम एक हजार रुपए तो खर्च करते ही होंगे लेकिन अगर कोई आपसे कहे कि 162 रुपए में ही अपनी जरूरतें और शौक दोनों पूरा कर लीजिए तो आपको कैसा लगेगा, या फिर चलिए इस रकम में 5 रुपए की भारी बढ़ोत्तरी और कर देते हैं. अब शायद ये मजाक सुनकर आपका गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ जाएगा. जरा सोचिए, ऐसी बेतुकी बात की कल्पना करना भी कितना हास्यप्रद है. लेकिन ये हकीकत है देश की सरकारी योजना ‘मनरेगा’ की. जहां सरकार ने दया करके मनरेगा के श्रमिकों को मिलने वाली मजदूरी में 5 रुपए की वृद्धि की है. ‘विश्व मजदूर दिवस’ पर जहां एक ओर देश का बुद्धिजीवी वर्ग मजदूर दिवस पर कभी न खत्म होने वाली बहस में जुटे हुए थे, वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 5 रुपए और एक चिट्ठी देकर मौन विरोध जता रहे थे.
 दरअसल, अप्रैल माह में केंद्र सरकार ने मनरेगा के अंतर्गत मिलने वाली मजदूरी में 5 रुपए की बढ़ोत्तरी की है. पश्चिम बंगाल और असम में 2 से 3 रुपए बढ़ाए गए हैं जबकि झारखंड में 5 रुपए की वृद्धि की गई है. यानि झारखंड में 162 रुपए की बजाय 167 रुपए मजदूरी मिलेगी. उल्लेखनीय है कि मजदूरों के हालातों का मजाक उठाते इस फैसले पर ‘मनरेगा’ योजना में पंजीकृत मजदूरों ने विरोध का एक नया तरीका ढूंढ़ निकाला है. ग्रामीण मजदूरों के लिए काम करने वाली संस्था ‘ग्रामीण स्वराज मजदूर संघ’ का कहना है कि जहां एक तरफ मजदूरों को मिलने वाली मजदूरी इतनी कम है वहां दूसरी ओर मात्र 5 रुपए की वृद्धि एक मजाक ही कहा जा सकता है.

 सभी मजदूर ‘विश्व मजदूर दिवस’ पर हाथों में 5 रुपए और एक चिट्ठी के साथ नजर आए. इस चिट्ठी में मजदूरों ने अपना दर्द बयां किया. उन्होंने प्रधानमंत्री को सम्बोधित करते हुए लिखा ‘इस साल आपकी सरकार ने मजदूरी में 5 रुपए की बढ़ोत्तरी की, हम झारखंड के निवासी अपने आपको बहुत सौभाग्यशाली मानते हैं जो हमें 5 रुपए की बढ़ोत्तरी मिली क्योंकि देश के 17 राज्यों में तो सिर्फ 2-3 रुपए की ही वृद्धि हुई है. हम जानते है कि सरकार पर पहले से ही व्यय का बहुत भार है इसलिए हम बढ़े हुए 5 रुपए लौटाकर सरकार की मदद करना चाहते हैं.

 चिट्टी में आगे लिखा हुआ है कि ‘सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिश की है जिसमें करीब 1 लाख करोड़ रुपए का अनुमानित व्यय होगा. ऐसे में कई दूसरे खर्च भी सरकार पर है इसलिए हम 5 रुपए वापस लौटाकर अपना सहयोग दे रहे हैं’.‘विश्व मजदूर दिवस’ पर देश में मजदूरों की ऐसी दशा और सरकारी योजना की बदहाली देश की दुखद कहानी बयां कर रही है. अब देखना ये है कि सरकार को ये व्यंग्य कितना समझ में आता है 

न्यूज़ source: jagranjunction.com

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