जम्मू कश्मीर में
शहीद हुए एक जवान की कहानी उसकी माँ की जुबानी
इस शहीद ने वो कर
दिखाया जो कोई और नहीं कर सकता इस शहीद को हमारे वेबसाइट के द्वारा सलाम करते हैं .
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| शहीद सतीश कुमार |
आप इस फोजी की
आखरी बात आप इनकी माँ से ही जानेगी हमारी वेबसाइट www.newstrick.net द्वारा शहीद की माँ से बात की गई जाने .
जम्मू-कश्मीर में
शहीद हो गए एक जवान की मां के साथ अंतिम बातचीत। "मां जम्मू-कश्मीर में कुछ आतंकी घुस आए हैं। मुठभेड़ चल रही
है। इसलिए 3 दिसंबर को मामा की लड़की की शादी में
नहीं आ पाऊंगा। आतंकियों को मार कर ही लौटूंगा।" बता दें कि यह बात बुधवार 2 दिसंबर को अपनी मां से फोन पर बातचीत करते हुए जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को शहीद हुए
लांसनायक सतीश कुमार ने कही थी। हरियाणा में भिवानी के
गांव माईकलां के 35 वर्षीय सतीश कुमार 21-आरआर (राज राइफल)
बटालियन में जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा क्षेत्र में तैनात थे। दिवाली पर घर में छुट्टियां बिताकर 16 नवंबर को ही ड्यूटी पर वापस लौटे थे। शुक्रवार को घात लगाए बैठे
आतंकियों ने उनकी बटालियन पर हमला कर दिया। मुठभेड़ में सतीश ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया। लेकिन लांसनायक खुद शहीद हो गए। शहीद का
पार्थिव शरीर रविवार दिल्ली से उनके गांव लाया जाएगा, जहां राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम
विदाई दी जाएगी। उन्हें सलामी देने के लिए हिसार कैंट से
स्पेशल गारद पहुंचेगी।
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| शहीद की माँ |
पिता बोले- शहीद
बेटे के बच्चों को भी सेना में भेजूंगा
छुट्टी बिताकर गए
सतीश से पिता आजाद सिंह ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में अपना ध्यान रखना। लेकिन पिता को क्या पता था कि
अबकी बार बेटा देश सेवा कर तिरंगे में लिपट घर
पहुंचेगा। आजाद ने कहा कि उनका बेटा देश सेवा करते हुए शहीद हुआ है, इसके लिए उन्हें
उस पर फख्र है। उनका कहना है कि वे शहीद बेटे के बच्चों को भी सेना में भेजेंगे।
तीसरी पीढ़ी थी
सेना में
सतीश के परिवार का देश की सेवा में अहम योगदान है। उनके दादा हवलदार फतेह सिंह राज राइफल में रह चुके थे। पिता आजाद सिंह बीएसएफ में इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत हुए हैं। सतीश 2001 में 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद सेना में भर्ती हुआ था। इसके बाद यूएनपीस कीपिंग में कांगों में अपनी सेवाएं दीं। छह-सात माह से हंदवाड़ा में तैनात थे। सतीश का बड़ा भाई जयप्रकाश खेती-बाड़ी का काम संभालता है। उसके भी दो बच्चे हैं।
सतीश के परिवार का देश की सेवा में अहम योगदान है। उनके दादा हवलदार फतेह सिंह राज राइफल में रह चुके थे। पिता आजाद सिंह बीएसएफ में इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत हुए हैं। सतीश 2001 में 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद सेना में भर्ती हुआ था। इसके बाद यूएनपीस कीपिंग में कांगों में अपनी सेवाएं दीं। छह-सात माह से हंदवाड़ा में तैनात थे। सतीश का बड़ा भाई जयप्रकाश खेती-बाड़ी का काम संभालता है। उसके भी दो बच्चे हैं।
सेना में हैंडबॉल
के कोच बनने वाले थे
सतीश हैंडबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे। कुछ समय बाद वे सेना में हैंडबॉल के प्रशिक्षक बनने वाले थे। उनकी शादी डिगरोता गांव की निर्मला से मई 2002 में हुई थी। उनकी 10 साल की लड़की निकिता और 8 साल का लड़का नितिन हैं। निकिता 5वीं और नितिन दूसरी कक्षा में है।
सतीश हैंडबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे। कुछ समय बाद वे सेना में हैंडबॉल के प्रशिक्षक बनने वाले थे। उनकी शादी डिगरोता गांव की निर्मला से मई 2002 में हुई थी। उनकी 10 साल की लड़की निकिता और 8 साल का लड़का नितिन हैं। निकिता 5वीं और नितिन दूसरी कक्षा में है।
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